शास्त्ररसास्वादः
Sadhvi Sanskritam Level 4
- श्रीमद्भगवद्गीता के चयनित अंशों का आस्वादन, श्री गोपालानन्द स्वामीकृत भाष्य सहित
- श्रीमद् सत्सङ्गिजीवनम् में वर्णित श्रीहरिगीता और पञ्चवर्तमान के समस्त प्रकरणों का आस्वादन
- संस्कृत वचनामृत ‘श्रीहरिवाक्यसुधासिन्धु’ के चयनित अंशों का आस्वादन
- ‘श्रीस्वामिनारायणदर्शसारसङ्ग्रहः’ का सम्पूर्ण अध्ययन (परम पूज्य सद्गुरु श्री माधवप्रियदासजी स्वामी, SGVP, छारोड़ी द्वारा रचित )
- महापूजा-विधि और राजोपचार-विधि का सम्पूर्ण एवं विस्तृत अध्ययन एवं प्रयोग
- सांख्ययोगी बहनें / पार्षद / गृहस्थ सत्संगी बहनें एवं बेटियाँ
- जो मूल स्वामिनारायण सम्प्रदाय लक्षी संस्कृत सीखने के लिए उत्सुक एवं जिज्ञासु हों
- जो कक्षा एवं स्वाध्याय हेतु सप्ताह में 15-16 घंटे दे सकें।
- पूर्ण ३-वर्षीय पाठ्यक्रम पूरा करने के लिए प्रतिबद्धता आवश्यक।
- कम्प्यूटर / लैपटॉप / मोबाइल, इंटरनेट, वेब-कैमरा एवं स्पीकर की सुविधा आवश्यक।
- 350+ hours of LIVE online classes
- Special Course Book & welcome gift
- Downloadable class materials
- Additional Reading Resources
- Anytime Doubt Solving on WhatsApp
- Assessment & Evaluation
- A Certificate of completion
- संस्कृत में आध्यात्मिक ग्रन्थों का अध्ययन एवं विश्लेषण करने की क्षमता
- महापूजा एवं राजोपचार-विधि का शुद्ध उच्चारण, विधिपूर्वक अनुष्ठान एवं अर्थबोध
- धार्मिक स्तोत्रों का सुस्वर पाठ एवं भावार्थ की समझ
- किसी भी संस्कृत ग्रन्थ का स्वाध्याय कर कथा-प्रवचन करने की क्षमता
संस्कृत के शास्त्रीय अध्ययन हेतु महिलाओं के लिए प्रथम बार विशेष अवसर!
साध्वी-संस्कृतम् - शास्त्ररसास्वादः
इस ३-वर्षीय पाठ्यक्रम का चतुर्थ और अन्तिम चरण है, जिसका अर्थ है -संस्कृत भाषा में प्रवेश का द्वार।
साध्वी-संस्कृतम्, पार्षद, सांख्ययोगी बहनों, गृहस्थ सत्संगी बहनों एवं बेटियों के लिए Namasteसंस्कृतम् द्वारा सुव्यवस्थित एवं क्रमबद्ध रूप से तैयार किया गया पाठ्यक्रम है।
अनेकशास्त्रं तु बहुवेदितव्यम्, अल्पश्च कालो बहवश्च विघ्नाः।
यत् सारभूतं तदुपासितव्यं, हंसो यथा क्षीरमिवाम्भुमध्यात्॥
साध्वीसंस्कृतम् की विशेषताएँ
संस्कृत का पूर्वज्ञान आवश्यक नहीं।
पढ़ना, लिखना, बोलना एवं समझना - मूल स्तर से क्रमशः अध्ययन।
संस्कृत व्याकरण, वैदिक साहित्य एवं दर्शन का परिचय।
शास्त्रों के सार एवं भाव को समझने पर विशेष बल।
समय की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए ऑनलाइन कक्षाएँ।
सम्पूर्ण पाठ्यक्रम में महिला आचार्या द्वारा शिक्षण एवं मार्गदर्शन।
उद्देश्य - महिलाओं में संस्कृत के प्रति रुचि, निर्भयता एवं ज्ञान विकसित करना तथा उन्हें मूल संस्कृत से शास्त्रों के भाव एवं सार तक पहुँचाना, श्रीजी महाराज के चरणों में संस्कृत-सेवा के रूप में।
सम्प्रदाय में ‘साधु’ शब्द त्यागी संतों के लिए प्रयुक्त होता है। स्त्री-त्यागी वर्ग में पार्षद एवं सांख्ययोगी बहनें आती हैं, अतः उनके लिए ‘साध्वी’ शब्द का प्रयोग उपयुक्त है।
वहीं, संस्कृत में ‘साधु’ का अर्थ सज्जन, श्रेष्ठ अथवा सदाचारी भी होता है और इसका स्त्रीलिङ्ग रूप ‘साध्वी’ है। इसी व्यापक अर्थ को ध्यान में रखते हुए, इस पाठ्यक्रम में गृहस्थ सत्संगी बहनों, माताओं एवं बेटियों का भी प्रवेश अनुमोदित किया गया है।
अतः ‘साध्वी-संस्कृतम्’ नाम त्यागी स्त्रीवर्ग के साथ-साथ संस्कृत सीखने की इच्छुक समस्त सत्संगी महिलाओं के लिए भी सार्थक एवं उपयुक्त है।
मनुष्य का स्वभाव है कि निःशुल्क प्राप्त वस्तु के प्रति अपेक्षित रुचि, नियमितता एवं उत्तरदायित्व सदैव बना रहे, यह आवश्यक नहीं। इसी भाव को ध्यान में रखते हुए इस तीन वर्षीय संस्कृत-अध्ययन पाठ्यक्रम में नाममात्र का शुल्क रखा गया है, ताकि अध्ययन के प्रति रुचि, नियमितता एवं प्रतिबद्धता बनी रहे।
यह पाठ्यक्रम संस्कृत-ज्ञान के प्रसार तथा साध्वी एवं साधकों को संस्कृत भाषा एवं शास्त्रों के अध्ययन का अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से संचालित है। भारतीय ज्ञान-परम्परा में गुरुदक्षिणा का विशेष महत्त्व रहा है। इसी भावना से अत्यल्प शुल्क निर्धारित किया गया है, जिससे यह ज्ञान-यज्ञ अधिकाधिक साध्वी-साधकों तक पहुँच सके और वे श्रद्धा एवं उत्तरदायित्व के साथ इस अध्ययन-यात्रा से जुड़ सकें।
३-वर्षीय पाठ्यक्रम के ४ चरण
प्रथमसोपान - भाषाप्रवेशः (2 मास)
संस्कृत भाषा की मूलभूत जानकारी एवं प्रयोग
द्वितीयसोपान - व्याकरणप्रवेशः (4 मास)
संस्कृत व्याकरण की सुदृढ़ नींव
तृतीयसोपान - शास्त्रप्रवेशः (1 वर्ष)
प्रमुख शास्त्रीय ग्रन्थों का परिचय एवं अध्ययन
चतुर्थसोपान - शास्त्ररसास्वादः (1.5 वर्ष)
शास्त्रों के भाव एवं ज्ञान का रसास्वादन