भाषाप्रवेशः
Sadhvi Sanskritam Level 1
- संस्कृत वर्णमाला एवं उच्चारण
- संस्कृत लिखना, बोलना एवं समझना
- दैनन्दिन जीवन में संस्कृत का प्रयोग एवं संवाद
- संस्कृत प्रार्थनाएँ एवं शान्तिमन्त्र
- संख्या और समय
- अकारान्त, आकारान्त एवं ईकारान्त शब्दों का वाक्यों में प्रयोग
- अव्यय शब्दों का प्रयोग
- वर्तमान, भूत एवं भविष्यत्काल का प्रयोग
- माहेश्वर सूत्र एवं लघुसिद्धान्तकौमुदी का संज्ञाप्रकरण
- सांख्ययोगी बहनें / पार्षद / गृहस्थ सत्संगी बहनें एवं बेटियाँ
- जो मूल स्वामिनारायणसम्प्रदाय लक्षी संस्कृत सीखने के लिए उत्सुक एवं जिज्ञासु हों
- जो कक्षा एवं स्वाध्याय हेतु सप्ताह में 3-6 घंटे दे सकें।
- पूर्ण ३-वर्षीय पाठ्यक्रम पूरा करने के लिए प्रतिबद्धता आवश्यक।
- संस्कृत का पूर्वज्ञान आवश्यक नहीं।
- कम्प्यूटर / लैपटॉप / मोबाइल, इंटरनेट, वेब-कैमरा एवं स्पीकर की सुविधा आवश्यक।
- 28-30 hours of LIVE online classes
- Special Course Book & welcome gift
- Downloadable class materials
- Additional Reading Resources
- Anytime Doubt Solving on WhatsApp
- Assessment & Evaluation
- A Certificate of completion
- संस्कृत पढ़ने, लिखने और समझने में आत्मविश्वास
- सरल संस्कृत में संवाद करने की क्षमता
- श्लोकों एवं मन्त्रों का शुद्ध पाठ
- द्वितीय सोपान के लिए सुदृढ आधार
संस्कृत के शास्त्रीय अध्ययन हेतु महिलाओं के लिए प्रथम बार विशेष अवसर!
साध्वी-संस्कृतम् - भाषाप्रवेशः
इस ३-वर्षीय पाठ्यक्रम का प्रथम चरण है, जिसका अर्थ है -संस्कृत भाषा में प्रवेश का द्वार।
साध्वी-संस्कृतम्, पार्षद, सांख्ययोगी बहनों, गृहस्थ सत्संगी बहनों एवं बेटियों के लिए Namasteसंस्कृतम् द्वारा सुव्यवस्थित एवं क्रमबद्ध रूप से तैयार किया गया पाठ्यक्रम है।
अनेकशास्त्रं तु बहुवेदितव्यम्, अल्पश्च कालो बहवश्च विघ्नाः।
यत् सारभूतं तदुपासितव्यं, हंसो यथा क्षीरमिवाम्भुमध्यात्॥
साध्वीसंस्कृतम् की विशेषताएँ
संस्कृत का पूर्वज्ञान आवश्यक नहीं।
पढ़ना, लिखना, बोलना एवं समझना - मूल स्तर से क्रमशः अध्ययन।
संस्कृत व्याकरण, वैदिक साहित्य एवं दर्शन का परिचय।
शास्त्रों के सार एवं भाव को समझने पर विशेष बल।
समय की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए ऑनलाइन कक्षाएँ।
सम्पूर्ण पाठ्यक्रम में महिला आचार्या द्वारा शिक्षण एवं मार्गदर्शन।
उद्देश्य - महिलाओं में संस्कृत के प्रति रुचि, निर्भयता एवं ज्ञान विकसित करना तथा उन्हें मूल संस्कृत से शास्त्रों के भाव एवं सार तक पहुँचाना, श्रीजी महाराज के चरणों में संस्कृत-सेवा के रूप में।
પૂજ્ય નમ્રતાબેન નાના બાળક ને જેમ મૉં પેંડામાં દવા પાઈ દે, એ રીતે રમતાં–રમતાં, વિવિધ ચિત્રો બતાવી સંભાષણમાં પ્રવેશ કરાવે છે અને સંસ્કૃત speech, projects અને exam ને creative કરી અને કઈ રીતે સંસ્કૃતમાં આગળ વધી જઈયે છીએ, એ ખ્યાલ જ રહેતો નથી.
- सा.यो धरतीभगिनी
साङ्ख्ययोगीJay Shree Swaminarayan... I can call this Digital Satsang. Study of Sanskrit along with sanskriti and Hinduism Knowledge... Will never regret joining these courses. The mentor Namrata Bhagini is very dedicated and involving. Her methods of teaching is just to a next level. Very Recommendable.
- सा.यो रीनाभगिनी
साङ्ख्ययोगीDr. Namrata bhagini’s teaching power and method is incomparable and inspirational for Sanskrit learners. I had a great experience learning Sanskrit, the beautiful and culturally rich language online with various ways of learning. The entire course is well structured and organised.
- अस्मिताभगिनी
सत्सङ्गी बहनसम्प्रदाय में ‘साधु’ शब्द त्यागी संतों के लिए प्रयुक्त होता है। स्त्री-त्यागी वर्ग में पार्षद एवं सांख्ययोगी बहनें आती हैं, अतः उनके लिए ‘साध्वी’ शब्द का प्रयोग उपयुक्त है।
वहीं, संस्कृत में ‘साधु’ का अर्थ सज्जन, श्रेष्ठ अथवा सदाचारी भी होता है और इसका स्त्रीलिङ्ग रूप ‘साध्वी’ है। इसी व्यापक अर्थ को ध्यान में रखते हुए, इस पाठ्यक्रम में गृहस्थ सत्संगी बहनों, माताओं एवं बेटियों का भी प्रवेश अनुमोदित किया गया है।
अतः ‘साध्वी-संस्कृतम्’ नाम त्यागी स्त्रीवर्ग के साथ-साथ संस्कृत सीखने की इच्छुक समस्त सत्संगी महिलाओं के लिए भी सार्थक एवं उपयुक्त है।
हाँ। संस्कृत का पूर्वज्ञान आवश्यक नहीं है। प्रथम स्तर से अक्षर-पठन एवं लेखन सिखाया जाता है।
मनुष्य का स्वभाव है कि निःशुल्क प्राप्त वस्तु के प्रति अपेक्षित रुचि, नियमितता एवं उत्तरदायित्व सदैव बना रहे, यह आवश्यक नहीं। इसी भाव को ध्यान में रखते हुए इस तीन वर्षीय संस्कृत-अध्ययन पाठ्यक्रम में नाममात्र का शुल्क रखा गया है, ताकि अध्ययन के प्रति रुचि, नियमितता एवं प्रतिबद्धता बनी रहे।
यह पाठ्यक्रम संस्कृत-ज्ञान के प्रसार तथा साध्वी एवं साधकों को संस्कृत भाषा एवं शास्त्रों के अध्ययन का अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से संचालित है। भारतीय ज्ञान-परम्परा में गुरुदक्षिणा का विशेष महत्त्व रहा है। इसी भावना से अत्यल्प शुल्क निर्धारित किया गया है, जिससे यह ज्ञान-यज्ञ अधिकाधिक साध्वी-साधकों तक पहुँच सके और वे श्रद्धा एवं उत्तरदायित्व के साथ इस अध्ययन-यात्रा से जुड़ सकें।
३-वर्षीय पाठ्यक्रम के ४ चरण
प्रथमसोपान - भाषाप्रवेशः (2 मास)
संस्कृत भाषा की मूलभूत जानकारी एवं प्रयोग
द्वितीयसोपान - व्याकरणप्रवेशः (4 मास)
संस्कृत व्याकरण की सुदृढ़ नींव
तृतीयसोपान - शास्त्रप्रवेशः (1 वर्ष)
प्रमुख शास्त्रीय ग्रन्थों का परिचय एवं अध्ययन
चतुर्थसोपान - शास्त्ररसास्वादः (1.5 वर्ष)
शास्त्रों के भाव एवं ज्ञान का रसास्वादन