शास्त्रप्रवेशः
Sadhvi Sanskritam Level 3
- वैदिक संस्कृत साहित्य - वेद, उपवेद, वेदशाखाएँ, उपनिषद् एवं उनका वैशिष्ट्य
- षड्दर्शन शास्त्र - सांख्य, योग, न्याय, वैशेषिक, पूर्वमीमांसा, वेदान्त
- श्रीस्वामिनारायण सम्प्रदाय द्वारा मान्य अष्ट सत्शास्त्र - वासुदेवमाहात्म्यम्, विष्णुसहस्रनामस्तोत्रम्, विदुरनीति, याज्ञवल्क्यस्मृति आदि
- छन्दशास्त्र एवं प्रमुख छन्दों का परिचय
- शिक्षापत्री के २१२ श्लोकों का सान्वय सम्पूर्ण अध्ययन
- श्रीमद् सत्सङ्गिजीवनम् के ९ अध्यायों के ग्रन्थमाहात्म्य का सम्पूर्ण अध्ययन
- श्रीस्वामिनारायण सम्प्रदाय के विविध धार्मिक स्तोत्रों का अध्ययन आदि
- सांख्ययोगी बहनें / पार्षद / गृहस्थ सत्संगी बहनें एवं बेटियाँ
- जो मूल स्वामिनारायण सम्प्रदाय लक्षी संस्कृत सीखने के लिए उत्सुक एवं जिज्ञासु हों
- जो कक्षा एवं स्वाध्याय हेतु सप्ताह में 10-15 घंटे दे सकें।
- पूर्ण ३-वर्षीय पाठ्यक्रम पूरा करने के लिए प्रतिबद्धता आवश्यक।
- कम्प्यूटर / लैपटॉप / मोबाइल, इंटरनेट, वेब-कैमरा एवं स्पीकर की सुविधा आवश्यक।
- 250+ hours of LIVE online classes
- Special Course Book & welcome gift
- Downloadable class materials
- Additional Reading Resources
- Anytime Doubt Solving on WhatsApp
- Assessment & Evaluation
- A Certificate of completion
- वैदिक संस्कृत साहित्य - वेद, पुराण एवं उपनिषदों का परिचय एवं अध्ययन
- भारतीय दर्शन के षडास्तिक दर्शनों में रुचि एवं समझ विकसित करना
- भगवान श्रीस्वामिनारायण द्वारा मान्य अष्ट सत्शास्त्रों का परिचय एवं सारग्रहण
- छन्दों की पहचान, धार्मिक स्तोत्रों का लयबद्ध एवं अर्थपूर्ण गायन
- शिक्षापत्री एवं श्रीमद्सत्सङ्गिजीवनम् के कथाप्रवचनकुशलता
- चतुर्थसोपान के लिए सुदृढ आधार
संस्कृत के शास्त्रीय अध्ययन हेतु महिलाओं के लिए प्रथम बार विशेष अवसर!
साध्वी-संस्कृतम् - शास्त्रप्रवेश
इस ३-वर्षीय पाठ्यक्रम का तृतीय चरण है, जिसका अर्थ है -संस्कृत भाषा में प्रवेश का द्वार।
साध्वी-संस्कृतम्, पार्षद, सांख्ययोगी बहनों, गृहस्थ सत्संगी बहनों एवं बेटियों के लिए Namasteसंस्कृतम् द्वारा सुव्यवस्थित एवं क्रमबद्ध रूप से तैयार किया गया पाठ्यक्रम है।
अनेकशास्त्रं तु बहुवेदितव्यम्, अल्पश्च कालो बहवश्च विघ्नाः।
यत् सारभूतं तदुपासितव्यं, हंसो यथा क्षीरमिवाम्भुमध्यात्॥
साध्वीसंस्कृतम् की विशेषताएँ
संस्कृत का पूर्वज्ञान आवश्यक नहीं।
पढ़ना, लिखना, बोलना एवं समझना - मूल स्तर से क्रमशः अध्ययन।
संस्कृत व्याकरण, वैदिक साहित्य एवं दर्शन का परिचय।
शास्त्रों के सार एवं भाव को समझने पर विशेष बल।
समय की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए ऑनलाइन कक्षाएँ।
सम्पूर्ण पाठ्यक्रम में महिला आचार्या द्वारा शिक्षण एवं मार्गदर्शन।
उद्देश्य - महिलाओं में संस्कृत के प्रति रुचि, निर्भयता एवं ज्ञान विकसित करना तथा उन्हें मूल संस्कृत से शास्त्रों के भाव एवं सार तक पहुँचाना, श्रीजी महाराज के चरणों में संस्कृत-सेवा के रूप में।
SGVP સંસ્થાના અધ્યક્ષ અને ભારતીય સંસ્કૃતિના સંરક્ષક એવા ગુરુવર્ય પૂજ્ય શાસ્ત્રી શ્રી માધવપ્રિયદાસજી સ્વામીની પ્રેરણાથી અમે શિક્ષાપત્રી, શ્રીમદ્ ભગવદ્ગીતા, ઉપનિષદ્ , શ્રીમદ્ સત્સંગિજીવન, તર્કસંગ્રહ(ન્યાય) , વચનામૃત ભૂમિકા આદિ સંસ્કૃત ગ્રંથોનો અભ્યાસ કર્યો છે. संस्कृताय जीवनम् અર્થાત્ સંસ્કૃત માટે જ જેમનું જીવન છે એવા અમારા અધ્યાપિકા શ્રીમતી નમ્રતાબેન, એમણે વિવિધ ઉપકરણોની મદદથી સરળ અને અદ્ભૂત ટેક્નિક દ્વારા અતિ ઉત્સાહથી અને સેવાભાવનાથી અમને સંસ્કૃતનો અભ્યાસ કરાવ્યો છે એ બદલ એમને અમે હ્દયથી અભિનંદીએ છીએ.
- सा.यो. सृष्टिभगिनी
साङ्ख्ययोगीसम्प्रदाय में ‘साधु’ शब्द त्यागी संतों के लिए प्रयुक्त होता है। स्त्री-त्यागी वर्ग में पार्षद एवं सांख्ययोगी बहनें आती हैं, अतः उनके लिए ‘साध्वी’ शब्द का प्रयोग उपयुक्त है।
वहीं, संस्कृत में ‘साधु’ का अर्थ सज्जन, श्रेष्ठ अथवा सदाचारी भी होता है और इसका स्त्रीलिङ्ग रूप ‘साध्वी’ है। इसी व्यापक अर्थ को ध्यान में रखते हुए, इस पाठ्यक्रम में गृहस्थ सत्संगी बहनों, माताओं एवं बेटियों का भी प्रवेश अनुमोदित किया गया है।
अतः ‘साध्वी-संस्कृतम्’ नाम त्यागी स्त्रीवर्ग के साथ-साथ संस्कृत सीखने की इच्छुक समस्त सत्संगी महिलाओं के लिए भी सार्थक एवं उपयुक्त है।
मनुष्य का स्वभाव है कि निःशुल्क प्राप्त वस्तु के प्रति अपेक्षित रुचि, नियमितता एवं उत्तरदायित्व सदैव बना रहे, यह आवश्यक नहीं। इसी भाव को ध्यान में रखते हुए इस तीन वर्षीय संस्कृत-अध्ययन पाठ्यक्रम में नाममात्र का शुल्क रखा गया है, ताकि अध्ययन के प्रति रुचि, नियमितता एवं प्रतिबद्धता बनी रहे।
यह पाठ्यक्रम संस्कृत-ज्ञान के प्रसार तथा साध्वी एवं साधकों को संस्कृत भाषा एवं शास्त्रों के अध्ययन का अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से संचालित है। भारतीय ज्ञान-परम्परा में गुरुदक्षिणा का विशेष महत्त्व रहा है। इसी भावना से अत्यल्प शुल्क निर्धारित किया गया है, जिससे यह ज्ञान-यज्ञ अधिकाधिक साध्वी-साधकों तक पहुँच सके और वे श्रद्धा एवं उत्तरदायित्व के साथ इस अध्ययन-यात्रा से जुड़ सकें।
३-वर्षीय पाठ्यक्रम के ४ चरण
प्रथमसोपान - भाषाप्रवेशः (2 मास)
संस्कृत भाषा की मूलभूत जानकारी एवं प्रयोग
द्वितीयसोपान - व्याकरणप्रवेशः (4 मास)
संस्कृत व्याकरण की सुदृढ़ नींव
तृतीयसोपान - शास्त्रप्रवेशः (1 वर्ष)
प्रमुख शास्त्रीय ग्रन्थों का परिचय एवं अध्ययन
चतुर्थसोपान - शास्त्ररसास्वादः (1.5 वर्ष)
शास्त्रों के भाव एवं ज्ञान का रसास्वादन